भौतिक भूगोल भौतिक विशेषताएं और प्राकृतिक प्रदेश - bhautik bhoogol bhautik visheshataen aur praakrtik pradesh

वर्तमान समय में भूगोल को अनेक प्रकार से विभाजित करने का प्रयास किया गया है और इन्ही प्रकारों में से एक प्रकार है भौतिक भूगोल. 
  • भौतिक भूगोल के अन्तर्गत सामान्यतः पृथ्वी से संबंधित स्थल मण्डल (Lithosphere), जल मण्डल (Hydrosphere), वायु मण्डल (Atmosphere) तथा पर्यावरण भूगोल (Environmental Geography) का क्रमबद्ध अध्ययन तथा इनके मध्य पारस्परिक क्रियाओं अध्ययन किया जाता है।

 

भारत की भौगोलिक स्थिति के बारे में 

 

  • भारत सम्पूर्ण एशिया का एक विशाल देश है, जिसकी आकृति चतुष्कोणीय हैं। इसकी विशालता के कारण इसे उपमहाद्वीप की संज्ञा भी दी जाती है। 
  • यह दक्षिण एशिया में स्थित है। 
  • भारत अक्षांशीय दृष्टि से उत्तरी गोलार्द्ध में तथा देशांतरीय दृष्टि से पूर्वी गोलार्द्ध में स्थित है। 
  • भारत का अक्षांशीय विस्तार 8°4 उत्तरी अक्षांश से 37°6 उत्तरी अक्षांश तक तथा देशांतरीय विस्तार 68°7 पूर्वी देशांतर से 97°25 पूर्वी देशांतर तक स्थित है।
  • कर्क रेखा भारत के मध्य से गुजरती है। 
  • भारत का सबसे उत्तरी बिन्दु इंदिरा कॉल है, जो जम्मू कश्मीर में है तथा सबसे दक्षिणी बिन्दु इंदिरा प्वाइन्ट है, जो अंडमान निकोबार द्वीप समूह के ग्रेट निकोबार में स्थित है।
  • इंदिरा प्वाइन्ट को पिगमेलियन प्वाइन्ट के नाम से भी जाना जाता है।
  •  भारत की मुख्य भूमि का दक्षिणतम बिन्दु कन्याकुमारी (तमिलनाडु) है। 
  • भारत का विस्तार ऊष्ण तथा उपोष्ण दोनों कटिबंधों में है, फिर भी समूचे भारत में ऊष्णकटिबंधीय मानसूनी जलवायु पाई जाती है।
  • भारत का क्षेत्रफल 32,87,263 किमी है तथा क्षेत्रफल के दृष्टिकोण से यह रूस, कनाडा, चीन, अमेरिका, ब्राजील तथा ऑस्ट्रेलिया के बाद विश्व का 7वां सबसे बड़ा (2.43 प्रतिशत) देश है। 
  • भारत की पूर्व से पश्चिम की लम्बाई 2,933 किमी तथा उत्तर से दक्षिण की लम्बाई 3,214 किमी है। 
  • भारत की कुल स्थलीय सीमा 15,200 किमी।  तथा मुख्य भूमि की तटीय सीमा 6,100 किमी है। द्वीपों सहित भारत की कुल तटीय सीमा 7,516.6 किमी है। इस प्रकार भारत की कुल सीमा 22,716.6 किमी है। 
  • यदि राज्यवार देखा जाए, तो गुजरात की तटीय लम्बाई सर्वाधिक तथा इसके बाद आन्ध्र प्रदेश का है।

 

भारत की भौगोलिक स्थिति का महत्व

 

स्थलाकृति के संदर्भ में 

  • भारतीय महाद्वीप तीनों ओर से सागर से घिरा है। पूर्व में बंगाल की खाड़ी, पश्चिम में अरब सागर तथा दक्षिण में हिन्द महासागर स्थित है। 
  • हिन्द महासागर के शीर्ष में स्थित होने के कारण भारत के पूर्व एवं पश्चिम को जोड़ने वाले जल एवं वायु मार्गों पर भारत का या पूर्व में के स्वत: नियंत्रण है, जो भू-सामरिक और आर्थिक दोनों दृष्टिकोणों से महत्वपूर्ण है।

 

जलवायु के संदर्भ में

 

  • भौगोलिक स्थिति के कारण ही भारत की जलवायु मानसूनी है। इसमें ऋतुओं का परिवर्तन तथा प्रत्येक ऋतु की विशेषता भारत को सम्पूर्ण विश्व में अलग पहचान प्रदान करती है। उत्तर में हिमालय, दक्षिण में सागरीय क्षेत्र एवं मरुस्थलीय तथा तटीय प्रभाव भारत को जलवायविक विविधता प्रदान करते हैं।

 

सामरिकता के संदर्भ में

 

  • भारत के उत्तर में महान हिमालय का स्थित होना तथा दक्षिण में हिन्द महासागर का स्थित होना इसकी सामरिक स्थिति को इंगित करता है। इस कारण भारत एशिया में ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण विश्व में महत्वपूर्ण स्थिति रखता है।

 

आर्थिक संदर्भ में

 

  • उष्णकटिबंधीय जलवायु होने के कारण भारत के विभिन्न क्षेत्र में जलवायविक विविधता दिखाई देती है, जिस कारण यहां तीनों प्रकार की फसलें रबी, खरीफ तथा जायद का उत्पादन होता है। 
  • भारत के दक्षिण में प्राचीनतम चट्टानों के उपस्थित होने के कारण यह क्षेत्र खनिज संसाधनों की दृष्टिकोण से अत्यन्त धनी है। भारत में दोनों प्रकार के धात्विक व अधात्विक खनिज पाए जाते हैं
  • भारत की लम्बी तटीय रेखा होने के कारण मत्स्य उत्पादन तथा अन्य जैविक संसाधनों में भारत अग्रणी है।

 

सामाजिक संदर्भ में

 

  • भारत अपनी भौगोलिक विशेषता के कारण प्राचीनकाल से ही कई ऐतिहासिक वंशों स्थली रहा है तथा समय के साथ-साथ कई देशों के साथ व्यापार, आर्थिक एवं सांस्कृतिक विकास के क्षेत्र में इसका महत्वपूर्ण स्थान है।
  • भारत में विभिन्न भौगोलिक दशाओं की उपस्थिति के कारण यहां सामाजिक एवं सांस्कृतिक विविधता दिखाई देती है। 
  • सुरक्षा के संदर्भ में भारत की प्रायद्वीपीय स्थिति उसकी सुरक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण रही है। जहां एक ओर दक्षिणी भारत में सागरीय स्थिति होने सागरीय स्थिति है के कारण हजारों वर्षों से इस ओर से भारत को किसी भी विदेशी आक्रमण का खतरा नहीं हुआ है

    भूगोल में भौतिक विशेषताएं क्या है?

    भौतिक भूगोल की प्रकृति / विशेषताएँ इसमें पर्यावरणीय तत्वों के स्थानिक प्रतिरूप तथा स्थानिक संबंधो का प्रादेशिक परिवेश का अध्ययन किया जाता है। साथ ही साथ स्थान समय के परिवेश में पर्यावरणीय तत्वों के परिवर्तनों की व्याख्या तथा उनके करने का अध्ययन किया जाता है।

    भौतिक भूगोल एवं प्राकृतिक भूगोल में क्या अंतर है?

    भूगोल प्राकृतिक व सामाजिक दोनों ही विज्ञान है, जो कि मानव व पर्यावरण दोनों का ही अध्ययन करता है। यह भौतिक व सांस्कृतिक विश्व को जोड़ता है। भौतिक भूगोल पृथ्वी की व्यवस्था से उत्पन्न प्राकृतिक पर्यावरण का अध्ययन करता है। मानव भूगोल राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और जनांकिकीय प्रक्रियाओं से सम्बंधित है ।

    भौतिक भूगोल क्या है भौतिक भूगोल की प्रकृति एवं अध्ययन क्षेत्र की व्याख्या कीजिए?

    भौतिक भूगोल (Physical geography) भूगोल की एक प्रमुख शाखा है जिसमें पृथ्वी के भौतिक स्वरूप का अध्ययन किया जाता हैं। यह धरातल पर अलग अलग जगह पायी जाने वाली भौतिक परिघटनाओं के वितरण की व्याख्याअध्ययन करता है, साथ ही यह भूविज्ञान, मौसम विज्ञान, जन्तु विज्ञान और रसायनशास्त्र से भी जुड़ा हुआ है।

    भूगोल का प्राकृतिक क्या है?

    भूगोल की प्रकृति (1) भूगोल भूतल का अध्ययन है : भूगोल ज्ञान की एक विशिष्ट विधा है जो पृथ्वी के तल की विशेषताओं का वैज्ञानिक विश्लेषण करता है। स्थान या क्षेत्र (place or space) भूगोल की आत्मा है जिसके संदर्भ में ही कोई भौगोलिक अध्ययन किया जाता है। भूतल या पृथ्वी के तल के वैज्ञानिक अध्ययन पर भूगोल का एकाधिकार है