हड़प्पा से क्या क्या प्राप्त हुआ है? - hadappa se kya kya praapt hua hai?

Indus Civilization Period: भारत और पाकिस्तान में पाया गया सिंधु घाटी सभ्यता जिसे हड़प्पा सभ्यता भी कहा जाता है, अब तक ज्ञात सभी सभ्यताओं में सबसे प्राचीन है। इसकी खोज 1921 में हुई। इसका विकास सिंधु और घघ्घर/हकड़ा के किनारे हुआ। हड़प्पा, मोहनजोदड़ो, कालीबंगा, लोथल, धोलावीरा और राखीगढ़ी इसके प्रमुख केन्द्र थे।

सिंधु सभ्‍यता का इतिहास (History of Indus Civilization)
इस सभ्‍यता के समय काल को लेकर आज भी इतिहासकारों के अलग-अलग राय हैं। कुछ इतिहासकारों के अनुसार इस सभ्यता का काल निर्धारण किया गया है, जो लगभग 2700 ई.पू. से 1900 ई. पू. तक का माना जाता है। वहीं पहले की खुदाई और शोध के आधार पर माना जाता था कि 2600 ईसा पूर्व अर्थात आज से 4617 वर्ष पूर्व हड़प्पा और मोहनजोदड़ो नगर सभ्यता की स्थापना हुई थी। इस सभ्‍यता को लेकर सबसे नवीनतम खोज आईआईटी खड़गपुर और भारतीय पुरातत्व विभाग के वैज्ञानिकों द्वारा की गई है। वैज्ञानिकों के मुताबिक यह सभ्यता 8000 साल पुरानी थी। इस लिहाज से यह सभ्यता मिस्र और मेसोपोटामिया की सभ्यता से भी पहले की है। मिस्र की सभ्यता 7,000 ईसा पूर्व से 3,000 ईसा पूर्व तक रहने के प्रमाण मिलते हैं, जबकि मेसोपोटामिया की सभ्यता 6500 ईसा पूर्व से 3100 ईसा पूर्व तक अस्तित्व में थी।

शोधकर्ता ने इसके अलावा हड़प्पा सभ्यता से 1,0000 वर्ष पूर्व की सभ्यता के प्रमाण भी खोज निकाले हैं। दिसम्बर 2014 में भिरड़ाना को सिन्धु घाटी सभ्यता का अब तक का खोजा गया सबसे प्राचीन नगर माना गया है। ब्रिटिश काल में हुई खुदाइयों के आधार पर पुरातत्ववेत्ता और इतिहासकारों का अनुमान है कि यह अत्यंत विकसित सभ्यता थी और ये शहर अनेक बार बसे और उजड़े हैं।
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श्रीराम और श्रीकृष्ण के काल के बाद हुआ पतन
प्रतिष्ठित रिसर्च पत्रिका नेचर द्वारा प्रकाशित रिसर्च में कहा गया है कि वैज्ञानिकों ने सिंधु घाटी की पॉटरी की नई सिरे से पड़ताल की और ऑप्टिकली स्टिम्युलेटेड लूम नेसन्स तकनीक का इस्तेमाल कर इसकी उम्र का पता लगाया तो यह 6,000 वर्ष पुराने निकले हैं। इसके अलावा अन्य कई तरह की शोध से यह पता चला कि यह सभ्यता 8,000 वर्ष पुरानी है। इसका मतलब यह कि यह सभ्यता तब विद्यमान थी जबकि भगवान श्रीराम (5114 ईसा पूर्व) का काल था और श्रीकृष्ण के काल (3228 ईसा पूर्व) में इसका पतन होना शुरू हो गया था।

सिंधु सभ्यता का विस्तार व अंत (Expansion and End of Indus Civilization)
वैज्ञानिकों के अनुसार सिंधु घाटी सभ्यता का विस्तार पाकिस्‍तान, अफगानिस्‍तान से लेकर हरियाणा के भिर्राना और राखीगढ़ी तक था। वैज्ञानिकों ने भिर्राना की एकदम नई जगह पर खुदाई शुरू की और बड़ी चीज बाहर लेकर निकले। इसमें जानवरों की हड्डियां, गायों के सिंग, बकरियों, हिरण और चिंकारे के अवशेष मिले। इन सभी के बारे में कार्बन 14 के जरिये जांच की गई। जिससे यह पता चला की उस दौर में सभ्यता को किस तरह की पर्यावरणीय स्थितियों का सामना करना पड़ा था। वहीं सिंधु सभ्यता नष्ट होने का कारण वैज्ञानिकों ने कमजोर मानसून और प्राकृतिक परिस्थितियों में बदलाव बताया। सिंधु घाटी में ऐसी कम से कम 8 प्रमुख जगहें हैं जहां संपूर्ण नगर खोज लिए गए हैं। जिनके नाम हड़प्पा, मोहनजोदड़ो, चनहुदड़ो, लोथल, कालीबंगा, सुरकोटदा, रंगपुर और रोपड़ है।
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सिंधु घाटी सभ्यता से जुड़े रोचक तथ्‍य (Interesting facts related to Indus Valley Civilization)
  • सिंधु सभ्यता की खोज रायबहादुर दयाराम साहनी ने की।
  • यह सभ्यता त्रिभुजाकार क्षेत्र में फैली हुई थी तथा इसका क्षेत्रफल 12,99,600 वर्ग किमी. था।
  • 1826 ई. में सर्वप्रथम चाल्स मर्सन को हड़प्पा से बड़ी संख्या में ईंटें प्राप्त हुई थी।
  • 1856 ई. में करांची और लाहौर के बीच रेल मार्ग बनाने के लिए ईंटों की आवश्यकता हुई , परिणामस्वरूप हड़प्पा के खंडहर की खुदाई की गई। खुदाई करते समय ही यहां एक प्राचीनतम स्थल होने का आभास हुआ।
  • विद्वानों ने हड़प्पा को सिंधु घाटी सभ्यता की प्रथम राजधानी कहा है।
  • यहां से प्राप्त बर्तनों पर मानव आकृतियां भी प्राप्त हुई हैं।
  • हड़प्पा से एक दर्पण प्राप्त हुआ है , जो तांबे का बना है। स्वास्तिक चिन्ह भी हड़प्पा की ही देन है। इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि सिंधु वासी सूर्य उपासना करते थे।
  • ऋग्वेद में हड़प्पा सभ्यता को हरियूपिया कहा गया है।

  • मेसोपोटामिया साहित्य में प्रयुक्त मेलुहा शब्द से सिंधु घाटी की पहचान की जाती है।
  • हड़प्पा से प्राप्त मुहरों पर एक श्रृंगी पशु का अंकन सर्वाधिक मिलता है।
  • हड़प्पा से प्राप्त मुद्रा में गरुड़ का अंकन मिला है। हड़प्पा से तांबा से बनी एक इक्का गाङी मिली है।
  • चांदी का सर्वप्रथम प्रयोग हड़प्पा के काल में हुआ था।
  • खोज में प्राप्त सुइयों से ज्ञात होता है कि सिंधु निवासी सिले हुए कपड़े पहनते थे।
  • सिंधु वासी पशुपति महादेव की पूजा करते थे।
  • सिंधु सभ्यता की लिपि चित्र प्रधान लिपि थी। इस लिपि में लगभग 400 वर्ण हैं।
  • स्वतंत्रता के बाद हड़प्पा सभ्यता के सर्वाधिक स्थल गुजरात में खोजे गये हैं।

  • हड़प्पा काल में मातृ देवियों की प्रधानता थी।
  • सिंधु सभ्यता के लोगों का मुख्य भोजन गेहूं था।
  • कब्रिस्तान R-37 का साक्ष्य हड़प्पा से प्राप्त हुआ है।
  • हड़प्पाकालीन स्थल हल्लूर से तलवार बनाने के साक्ष्य मिले हैं।
  • हड़प्पा से प्राप्त धरती देवी की समानता मिस्र की आइसिस देवी से की जाती है।
  • सिंधु सभ्यता की सर्वोत्तम कलाकृतियां वहां से प्राप्त मुहरें हैं।

हड़प्पा से क्या क्या प्राप्त हुआ?

इस सभ्यता से तांबे की इक्का गाड़ी, उर्वरता की देवी, कांस्य दर्पण, मछुआरे का चित्र,गरुड़ की मूर्ति,शिव की मूर्ति साक्ष्य के रूप में मिले हैं।

हड़प्पा का दूसरा नाम क्या है?

सिंधु घाटी सभ्यता (3300-1700 ई. पू.) विश्व की प्राचीन नदी घाटी सभ्यताओं में से एक प्रमुख सभ्यता थी. यह हड़प्पा सभ्यता और सिंधु-सरस्वती सभ्यता के नाम से भी जानी जाती है.

मोहनजोदड़ो से क्या क्या प्राप्त हुआ?

अनोखा है मोहनजोदड़ो का इतिहास खुदाई के दौरान इस शहर के बारे में लोगों को जानकारी हुई, इसमें बड़ी बड़ी इमारतें, जल कुंड, मजबूत दिवार वाले घर, सुंदर चित्रकारी, मिट्टी व धातु के बर्तन, मुद्राएँ, मूर्तियाँ, ईट, तराशे हुए पत्थर और भी बहुत सी चीजें मिली। जिससे ये पता चलता है कि यहाँ एक व्यवस्थित शहर बना हुआ था।

हड़प्पा संस्कृति की सबसे महत्वपूर्ण वस्तु क्या है?

हड़प्पा सभ्यता की प्रमुख विशेषताएं सिंधु घाटी सभ्यता के लोग धार्मिक तथा अर्थ उनकी धार्मिक मान्यताएं थी. सिंधु वासी लिंग एवं योनि के प्रतीकों की पूजा करते थे. इसके अलावा वह वृक्ष पूजा, पशु पूजा, अग्नि कृत्य, स्नान ध्यान और जल देवता की पूजा करते थे. वहां के लोग पवित्र स्नान और जल पूजा का धार्मिक महत्व समझते थे.